पढ़िए दफ़्तर 5 पैगंबर मुस्तफा (उन पर सलाम) के इस कथन की व्याख्या में कि तुम्हें एक ऐसे साथी के साथ दफन होना ही होगा जो जीवित है और तुम उसके साथ मरे हुए दफन होते हो। यदि वह उदार था तो तुम्हें सम्मान देगा, और यदि वह नीच था तो तुम्हें त्याग देगा। और वह साथी तुम्हारा कर्म है, इसलिए जितना हो सके उसे सुधारो। रसूलुल्लाह ने सच कहा। शेर 1062

M5:1062 — فقر خواهی آن به صحبت قایمست / نه زبانت کار می‌آید نه دست

فقر خواهی آن به صحبت قایمستنه زبانت کار می‌آید نه دست
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M5:1062

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अर्थ · به زبانِ تو — आपकी भाषा · AI

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