पढ़िए› दफ़्तर 5› शेख द्वारा मुरीदों को और पैगंबर द्वारा उम्मत को तालीम देने का दृष्टांत, कि वे सीधे हक की तालीम को बर्दाश्त नहीं कर सकते और हक से परिचित नहीं हैं, जैसे तोता आदमी की सूरत से परिचित नहीं होता जिससे वह तालीम ले सके। हक ताला शेख को मुरीद के सामने तोते की तरह एक आईना रखता है और आईने के पीछे से तालीम देता है। "अपनी जुबान को इससे न हिलाओ; यह केवल वही है जो वही किया जाता है।" यह अनंत समस्या की शुरुआत है, जैसे तोते का आईने के अंदर चोंच हिलाना, जिसे तुम उसका ख्याल कहते हो, उसकी इच्छा और नियंत्रण के बिना है, जो उस बाहरी तोते के पढ़ने का प्रतिबिंब है जो सीखने वाला है, न कि उस शिक्षक का प्रतिबिंब जो आईने के पीछे है। लेकिन बाहरी तोते का पढ़ना उस शिक्षक का नियंत्रण है। तो यह एक दृष्टांत है, एक उपमा नहीं।› शेर 1440
M5:1440 — هم صفیر مرغ آموزند خلق / کین سخن کار دهان افتاد و حلق
M5:1440
अर्थ · به زبانِ تو — आपकी भाषा · AI
Discussion — Ask about this beyt — answered from the Masnavi, every verse cited
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