पढ़िए› दफ़्तर 5› ध्रुवन के लोगों की कहानी और गरीबों से उनकी ईर्ष्या, कि उनके पिता ने अपनी सादगी के कारण बगीचे की अधिकांश आय गरीबों को दे दी थी। जब अंगूर होते, तो दसवां हिस्सा देते; जब किशमिश और सिरप बनता, तो दसवां हिस्सा देते; जब हलवा और पालुदा बनाते, तो दसवां हिस्सा देते; और जब चारा होता, तो दसवां हिस्सा देते। और जब वे खलिहान में अनाज को पीटते, तो मिश्रित अनाज से दसवां हिस्सा देते; और जब गेहूं भूसे से अलग होता, तो दसवां हिस्सा देते; और जब आटा बनाते, तो दसवां हिस्सा देते; और जब आटा गूंथते, तो दसवां हिस्सा देते; और जब रोटी बनाते, तो दसवां हिस्सा देते। परिणामतः, अल्लाह ताला ने उस बगीचे और फसल में बरकत रखी थी, जिससे सभी अन्य बगीचों के मालिक फलों और पैसे दोनों के लिए उसके मोहताज रहते थे, और वह उनमें से किसी का मोहताज नहीं था। उनके बच्चे सिर्फ दसवें हिस्से के खर्च को देखते थे और उस बरकत को नहीं देखते थे, जैसे उस बदकिस्मत औरत ने कद्दू को नहीं देखा और गधे को देखा।› शेर 1494
M5:1494 — تا بدانی اصلِ اصلِ رزق اوست / تا همو را جوید آنکه رزقجوست
M5:1494
अर्थ · به زبانِ تو — आपकी भाषा · AI
Discussion — Ask about this beyt — answered from the Masnavi, every verse cited
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