पढ़िए› दफ़्तर 5› यह बताते हुए कि जिस प्राणी से तुम्हें कोई ज़ुल्म पहुँचता है, असल में वह एक औजार की तरह है। आरिफ (ज्ञानी) वही है जो अल्लाह की ओर रुजू करे, न कि औजार की ओर। और अगर वह औजार की ओर रुजू करता है, तो ज़ाहिर तौर पर वह अज्ञानता से नहीं करता, बल्कि किसी मसलेहत (भलाई) के लिए, जैसा कि बायजीद (अल्लाह उनकी आत्मा को पवित्र करे) ने कहा कि इतने सालों से मैंने किसी मखलूक से बात नहीं की है और किसी मखलूक की बात नहीं सुनी है, लेकिन लोग ऐसा सोचते हैं कि मैं उनसे बात करता हूँ और उनकी बातें सुनता हूँ, क्योंकि वे अक्बर मुखातिब को नहीं देखते, जो उनके लिए आवाज़ की तरह हैं। एक समझदार सुनने वाले का ध्यान आवाज़ पर नहीं होता, जैसा कि मशहूर कहावत है: दीवार ने कील से कहा, 'तुम मुझे क्यों फाड़ रहे हो?' कील ने कहा, 'उसे देखो जो मुझे ठोक रहा है।'› शेर 1683
M5:1683 — با سنان و تیغ لابه چون کنی / کو اسیر آمد به دست آن سنی
M5:1683
अर्थ · به زبانِ تو — आपकी भाषा · AI
Discussion — Ask about this beyt — answered from the Masnavi, every verse cited
Your conversation stays on this device unless you share it.
What readers asked0
No questions shared yet — yours could be the first.