पढ़िए› दफ़्तर 5› माशूक़ ने आशिक़ से पूछा, “तुम खुद को ज़्यादा प्यार करते हो या मुझे?” उसने कहा, “मैं खुद से मर चुका हूँ और तुझसे ज़िंदा हूँ। मैं खुद से और अपनी सिफात (गुणों) से नेस्त-ओ-नाबूद हो गया हूँ और तुझसे हस्ती में आया हूँ। मैंने अपना इल्म (ज्ञान) भुला दिया है और तेरे इल्म से आलिम (ज्ञानी) बन गया हूँ। मैंने अपनी क़ुदरत (शक्ति) भुला दी है और तेरी क़ुदरत से क़ादिर (शक्तिशाली) बन गया हूँ। अगर मैं खुद को प्यार करता हूँ, तो मैंने तुझे प्यार किया है; और अगर मैं तुझे प्यार करता हूँ, तो मैंने खुद को प्यार किया है।” “जिसके पास यक़ीन का आईना हो, भले ही वह खुद को देखने वाला हो, वह खुदा को देखने वाला होता है।” “अपनी सिफ़ात के साथ मैं अपनी मखलूक के सामने आता हूँ। जिसने तुम्हें देखा, उसने मुझे देखा, और जिसने तुम्हारी मंज़िल तय की, उसने मेरी मंज़िल तय की।” और इसी तरह।› शेर 2041
M5:2041 — وصف هستی میرود از پیکرت / وصف مستی میفزاید در سرت
M5:2041
अर्थ · به زبانِ تو — आपकी भाषा · AI
Discussion — Ask about this beyt — answered from the Masnavi, every verse cited
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