पढ़िए› दफ़्तर 5› तौबा के लिए नसू का पहुँचना और आवाज़ आना कि "हमने सबको ढूँढा, नसू को ढूँढो," और उस खौफ़ से नसू का बेहोश हो जाना, और फिर सबसे बड़ी अड़चन के बाद काम का खुल जाना, जैसा कि रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) फ़रमाते थे जब उन्हें कोई बीमारी या ग़म होता था: "जब परेशानी बढ़ जाती है, तो वह खुल जाती है।"› शेर 2279
M5:2279 — چونک هوشش رفت و پایش بر گشاد / میپرد آن باز سوی کیقباد
چونک هوشش رفت و پایش بر گشادمیپرد آن باز سوی کیقباد
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M5:2279
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अर्थ · به زبانِ تو — आपकी भाषा · AI
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