पढ़िए दफ़्तर 5 तवक्कुल (अल्लाह पर भरोसा) के मायने को साबित करने के लिए उस ज़ाहिद की कहानी जिसने अस्बाब (साधनों) के बीच से तवक्कुल को आज़माया। वह शहर से बाहर निकला और क़वारअ (आपदाओं) और लोगों के रास्ते से दूर एक वीरान पहाड़ के पास, बहुत भूख की हालत में, एक पत्थर पर सिर रखकर सो गया, और अपने आप से कहा: "मैंने तेरी साधन-सुलझाने वाली और रिज़क़ देने वाली जात पर तवक्कुल किया, और मैं अस्बाब से कट गया हूँ ताकि मैं तवक्कुल के सबब को देख सकूँ।" शेर 2400

M5:2400 — گر بخواهی ور نخواهی رزق تو / پیش تو آید دوان از عشق تو

گر بخواهی ور نخواهی رزق توپیش تو آید دوان از عشق تو
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M5:2400

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अर्थ · به زبانِ تو — आपकी भाषा · AI

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