पढ़िए दफ़्तर 5 उस व्यक्ति की कहानी जो डर के मारे अपने आप को एक घर में फेंक दिया, उसका चेहरा केसर की तरह पीला, होंठ नीले रंग के, हाथ पेड़ के पत्तों की तरह काँप रहे थे। घर के मालिक ने पूछा, 'सब खैरियत तो है? क्या हुआ?' उसने कहा, 'बाहर गधे पकड़े जा रहे हैं मज़दूरी के लिए।' मालिक ने कहा, 'मुबारक हो, गधे पकड़े जा रहे हैं, तुम गधे नहीं हो, तो तुम क्यों डर रहे हो?' उसने कहा, 'गधे को गंभीरता से पकड़ा जा रहा है, आज इम्तियाज़ खत्म हो गया है। मुझे डर है कि मुझे गधा समझ लिया जाएगा।' शेर 2537

M5:2537 — واقعه چونست چون بگریختی / رنگ رخساره چنین چون ریختی

واقعه چونست چون بگریختیرنگ رخساره چنین چون ریختی
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M5:2537

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अर्थ · به زبانِ تو — आपकी भाषा · AI

Discussion — Ask about this beyt — answered from the Masnavi, every verse cited

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