पढ़िए› दफ़्तर 5› उस व्यक्ति की कहानी जो डर के मारे अपने आप को एक घर में फेंक दिया, उसका चेहरा केसर की तरह पीला, होंठ नीले रंग के, हाथ पेड़ के पत्तों की तरह काँप रहे थे। घर के मालिक ने पूछा, 'सब खैरियत तो है? क्या हुआ?' उसने कहा, 'बाहर गधे पकड़े जा रहे हैं मज़दूरी के लिए।' मालिक ने कहा, 'मुबारक हो, गधे पकड़े जा रहे हैं, तुम गधे नहीं हो, तो तुम क्यों डर रहे हो?' उसने कहा, 'गधे को गंभीरता से पकड़ा जा रहा है, आज इम्तियाज़ खत्म हो गया है। मुझे डर है कि मुझे गधा समझ लिया जाएगा।'› शेर 2557
M5:2557 — صحن ارض الله واسع آمده / هر درختی از زمینی سر زده
صحن ارض الله واسع آمدههر درختی از زمینی سر زده
✦ इस बैत को हिन्दी में प्रस्तुत करें
M5:2557
❋ ❋ ❋
अर्थ · به زبانِ تو — आपकी भाषा · AI
❋
Discussion — Ask about this beyt — answered from the Masnavi, every verse cited
Your conversation stays on this device unless you share it.
What readers asked0
No questions shared yet — yours could be the first.