पढ़िए› दफ़्तर 5› इतने सालों बाद रेगिस्तान से गजनी शहर में शेख का आना और ग़ैबी इशारे से ज़नबील घुमाना और जो कुछ जमा होता उसे गरीबों में तक़सीम करना। "जिसकी जान 'लब्बेक' की आवाज़ सुनने के लिए बेताब है, उसके लिए एक के बाद एक चिट्ठी और एक के बाद एक पैगंबर आते हैं।" जैसे घर की खिड़की खुली रहे तो धूप, चाँदनी, बारिश, ख़त वगैरह का आना रुकता नहीं।› शेर 2690
M5:2690 — تا شوم غرقهٔ مذلت من تمام / تا سقطها بشنوم از خاص و عام
تا شوم غرقهٔ مذلت من تمامتا سقطها بشنوم از خاص و عام
✦ इस बैत को हिन्दी में प्रस्तुत करें
M5:2690
❋ ❋ ❋
अर्थ · به زبانِ تو — आपकी भाषा · AI
❋
Discussion — Ask about this beyt — answered from the Masnavi, every verse cited
Your conversation stays on this device unless you share it.
What readers asked0
No questions shared yet — yours could be the first.