पढ़िए› दफ़्तर 5› इतने सालों बाद रेगिस्तान से गजनी शहर में शेख का आना और ग़ैबी इशारे से ज़नबील घुमाना और जो कुछ जमा होता उसे गरीबों में तक़सीम करना। "जिसकी जान 'लब्बेक' की आवाज़ सुनने के लिए बेताब है, उसके लिए एक के बाद एक चिट्ठी और एक के बाद एक पैगंबर आते हैं।" जैसे घर की खिड़की खुली रहे तो धूप, चाँदनी, बारिश, ख़त वगैरह का आना रुकता नहीं।› शेर 2713
M5:2713 — عاشقی کز عشق یزدان خورد قوت / صد بدن پیشش نیرزد ترهتوت
عاشقی کز عشق یزدان خورد قوتصد بدن پیشش نیرزد ترهتوت
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M5:2713
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अर्थ · به زبانِ تو — आपकी भाषा · AI
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