पढ़िए दफ़्तर 5 ग़ैब से शेख को इशारा आया कि "यह दो साल तुमने हमारे हुक्म से लिया और दिया। अब से तुम दो और मत लो। अपनी चादर के नीचे हाथ डालो, क्योंकि हमने उसे तुम्हारे हक़ में अबू हुरैरा की थैली जैसा बना दिया है। जो चाहोगे, पाओगे, ताकि दुनिया वाले यक़ीन कर लें कि एक ऐसी दुनिया भी है जहाँ मिट्टी हाथ में लेने से सोना बन जाती है, मुर्दा उसमें आए तो ज़िंदा हो जाता है, सबसे बड़ा अशुभ उसमें आए तो सबसे बड़ा शुभ हो जाता है, कुफ़्र उसमें आए तो ईमान बन जाता है, ज़हर उसमें आए तो ज़हर मार बन जाता है। न यह इस दुनिया में दाख़िल है और न ही इस दुनिया से ख़ारिज, न नीचे है और न ऊपर, न मुत्तसिल है और न मुनफ़सिल, बे-चून-ओ-चिरा। हर पल उससे हज़ारों असर और नमूने ज़ाहिर होते हैं, जैसे हाथ की कारीगरी हाथ की सूरत से, आँख की ग़मज़ा आँख की सूरत से, और ज़बान की फ़साहत ज़बान की सूरत से न दाख़िल है और न ख़ारिज, न मुत्तसिल है और न मुनफ़सिल। और अक़लमंद के लिए इशारा ही काफ़ी है।" शेर 2785

M5:2785 — هین ز گنج رحمت بی‌مر بده / در کف تو خاک گردد زر بده

هین ز گنج رحمت بی‌مر بدهدر کف تو خاک گردد زر بده
✦ इस बैत को हिन्दी में प्रस्तुत करें

M5:2785

❋ ❋ ❋

अर्थ · به زبانِ تو — आपकी भाषा · AI

Discussion — Ask about this beyt — answered from the Masnavi, every verse cited

Your conversation stays on this device unless you share it.

What readers asked

No questions shared yet — yours could be the first.