पढ़िए› दफ़्तर 5› उस गाय की कहानी जो एक बड़े द्वीप पर अकेली रहती है। अल्लाह ताला उस बड़े द्वीप को पौधों और फूलों से भर देता है जो उस गाय का चारा होते हैं। शाम तक वह गाय सब कुछ खा लेती है और पहाड़ जैसी मोटी हो जाती है। जब रात होती है, तो उसे चिंता और डर के मारे नींद नहीं आती कि "मैंने पूरा जंगल चर लिया है, कल मैं क्या खाऊँगी?" इस चिंता से वह दुबली हो जाती है, जैसे दिन के उजाले में उठती है। वह पूरे जंगल को कल से ज़्यादा हरा-भरा और घना देखती है; फिर से चरती है और मोटी हो जाती है, फिर रात में वही चिंता उसे घेर लेती है। सालों से वह ऐसा ही देखती है और भरोसा नहीं करती।› शेर 2856
M5:2856 — باز شب اندر تب افتد از فَزَع / تا شود لاغر ز خوف منتَجَع
باز شب اندر تب افتد از فَزَعتا شود لاغر ز خوف منتَجَع
✦ इस बैत को हिन्दी में प्रस्तुत करें
M5:2856
❋ ❋ ❋
अर्थ · به زبانِ تو — आपकी भाषा · AI
❋
Discussion — Ask about this beyt — answered from the Masnavi, every verse cited
Your conversation stays on this device unless you share it.
What readers asked0
No questions shared yet — yours could be the first.