पढ़िए› दफ़्तर 5› उस गाय की कहानी जो एक बड़े द्वीप पर अकेली रहती है। अल्लाह ताला उस बड़े द्वीप को पौधों और फूलों से भर देता है जो उस गाय का चारा होते हैं। शाम तक वह गाय सब कुछ खा लेती है और पहाड़ जैसी मोटी हो जाती है। जब रात होती है, तो उसे चिंता और डर के मारे नींद नहीं आती कि "मैंने पूरा जंगल चर लिया है, कल मैं क्या खाऊँगी?" इस चिंता से वह दुबली हो जाती है, जैसे दिन के उजाले में उठती है। वह पूरे जंगल को कल से ज़्यादा हरा-भरा और घना देखती है; फिर से चरती है और मोटी हो जाती है, फिर रात में वही चिंता उसे घेर लेती है। सालों से वह ऐसा ही देखती है और भरोसा नहीं करती।› शेर 2859
M5:2859 — هیچ روزی کم نیامد روزیَم / چیست این ترس و غم و دلسوزیَم؟
هیچ روزی کم نیامد روزیَمچیست این ترس و غم و دلسوزیَم؟
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M5:2859
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अर्थ · به زبانِ تو — आपकी भाषा · AI
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