पढ़िए› दफ़्तर 5› उस दरवेश की कहानी जिसने हेरात में खुरासान के अमीर के सजाए हुए गुलामों को देखा, और वे तेज़ घोड़ों पर सवार थे, जरी के क़बा और सोने के जड़े हुए टोप पहने हुए थे, और उसने पूछा कि "ये कौन से अमीर और कौन से राजा हैं?" उसे बताया गया कि "ये अमीर नहीं हैं, ये खुरासान के अमीर के गुलाम हैं।" उसने आसमान की ओर देखा और कहा कि "ऐ ख़ुदा! गुलाम पालना अमीर से सीख।" वहाँ मुस्तौफ़ी को अमीर कहते हैं।› शेर 3163
M5:3163 — بود محتاج و برهنه و بینوا / در زمستان لرز لرزان از هوا
بود محتاج و برهنه و بینوادر زمستان لرز لرزان از هوا
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M5:3163
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अर्थ · به زبانِ تو — आपकी भाषा · AI
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