पढ़िए› दफ़्तर 5› उस जाबरी काफ़िर का फिर से उस सुन्नी को जवाब देना जो उसे इस्लाम की दावत दे रहा था और उसे जबर के अक़ीदे को छोड़ने की दावत दे रहा था, और दोनों तरफ से बहस का लंबा चलना, कि इشكال और जवाब के मसले को सिर्फ़ सच्चा इश्क़ ही हल कर सकता है, जिसे इन बातों की परवाह नहीं होती। "और यह अल्लाह का फ़ज़ल है, जिसे चाहे अता करता है।"› शेर 3218
M5:3218 — عزت کعبه بود و آن نادیه / رهزنی اعراب و طول بادیه
عزت کعبه بود و آن نادیهرهزنی اعراب و طول بادیه
✦ इस बैत को हिन्दी में प्रस्तुत करें
M5:3218
❋ ❋ ❋
अर्थ · به زبانِ تو — आपकी भाषा · AI
❋
Discussion — Ask about this beyt — answered from the Masnavi, every verse cited
Your conversation stays on this device unless you share it.
What readers asked0
No questions shared yet — yours could be the first.