पढ़िए दफ़्तर 5 उस जाबरी काफ़िर का फिर से उस सुन्नी को जवाब देना जो उसे इस्लाम की दावत दे रहा था और उसे जबर के अक़ीदे को छोड़ने की दावत दे रहा था, और दोनों तरफ से बहस का लंबा चलना, कि इشكال और जवाब के मसले को सिर्फ़ सच्चा इश्क़ ही हल कर सकता है, जिसे इन बातों की परवाह नहीं होती। "और यह अल्लाह का फ़ज़ल है, जिसे चाहे अता करता है।" शेर 3237

M5:3237 — لب ببندد سخت او از خیر و شر / تا نباید کز دهان افتد گهر

لب ببندد سخت او از خیر و شرتا نباید کز دهان افتد گهر
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M5:3237

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अर्थ · به زبانِ تو — आपकी भाषा · AI

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