पढ़िए दफ़्तर 5 उस अमीर की कहानी जिसने अपने गुलाम से कहा कि शराब लाओ। गुलाम गया और शराब का सुराही ले आया। रास्ते में एक ज़ाहिद था, उसने अच्छी बात का हुक्म दिया, एक पत्थर फेंका और सुराही तोड़ दी। अमीर ने सुना और ज़ाहिद को सज़ा देने का इरादा किया। और यह इरादा ईसा (उन पर सलाम) के दीन के ज़माने में था, जब शराब हराम नहीं हुई थी, लेकिन ज़ाहिद तक़वा कर रहा था और ऐश-ओ-इशरत से रोक रहा था। शेर 3458

M5:3458 — گوشمال محنت بی‌زینهار / داغها بر داغها چندین هزار

گوشمال محنت بی‌زینهارداغها بر داغها چندین هزار
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M5:3458

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अर्थ · به زبانِ تو — आपकी भाषा · AI

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