पढ़िए› दफ़्तर 5› ज़िया-ए-दलक़ की कहानी, जो बहुत लंबा था, और उसका भाई शेख-उल-इस्लाम ताज़ बलख़ बहुत छोटा कद का था। और यह शेख-उल-इस्लाम अपने भाई ज़िया से शर्मिंदा रहता था। ज़िया उसकी कक्षा में आया, और बलख़ के सभी बड़े लोग उसकी कक्षा में मौजूद थे। ज़िया ने सलाम किया और चला गया। शेख-उल-इस्लाम ने आधा खड़ा होकर सरसरी तौर पर कहा, 'हाँ, तुम बहुत लंबे हो, थोड़ा कम करो।'› शेर 3483
M5:3483 — دشمن راه خدا را خوار دار / دزد را منبر منه بر دار دار
دشمن راه خدا را خوار داردزد را منبر منه بر دار دار
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M5:3483
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अर्थ · به زبانِ تو — आपकी भाषा · AI
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