पढ़िए दफ़्तर 5 मनुष्य के शरीर का एक अतिथिगृह से और विभिन्न विचारों का विभिन्न मेहमानों से उपमा, सूफी का संतोष में रहना उन दुख और सुख के विचारों के प्रति, जैसे एक मेहमान-नवाज़, परदेसियों का सम्मान करने वाला, ख़लील जैसा व्यक्ति, जिसके घर का दरवाज़ा हमेशा खुला रहता था, काफ़िर और मोमिन, अमीन और ख़ाइन सबके लिए, और वह सभी मेहमानों के साथ ताज़ा मुख रखता था शेर 3638

M5:3638 — هست مهمان‌خانه این تن ای جوان / هر صباحی ضیف نو آید دوان

هست مهمان‌خانه این تن ای جوانهر صباحی ضیف نو آید دوان
✦ इस बैत को हिन्दी में प्रस्तुत करें

M5:3638

❋ ❋ ❋

अर्थ · به زبانِ تو — आपकी भाषा · AI

Discussion — Ask about this beyt — answered from the Masnavi, every verse cited

Your conversation stays on this device unless you share it.

What readers asked

No questions shared yet — yours could be the first.