पढ़िए› दफ़्तर 5› कमज़ोर दिल और सुस्ती का वर्णन, ऐसे सूफी का जो छाया में पला-बढ़ा हो, जिसने मुजाहदा न किया हो, जिसने इश्क़ का दर्द और दाग़ न चखा हो, जो आम लोगों के सजदे और हाथ चूमने से, और उनके इज्ज़त से देखने और उंगली से इशारा करने से कि 'आज ज़माने में यही सूफी है' – इससे गुमराह हो गया हो और वहम से बीमार हो गया हो, जैसे वह शिक्षक जिससे बच्चों ने कहा कि 'आप बीमार हैं', और इस वहम के साथ कि 'मैं मुजाहिद हूँ, मुझे इस राह में पहलवान समझते हैं', गाज़ियों के साथ जंग में गया हो कि 'ज़ाहिर में भी मैं अपनी हुनर दिखाऊँ, जिहाद-ए-अकबर में तो मैं मुस्तसना हूँ, जिहाद-ए-असग़र मेरे लिए क्या मायने रखता है', शेर का ख़्याल देखकर और बहादुरी के कारनामे करके और इस बहादुरी में मस्त होकर, जंगल की ओर शेर की तलाश में निकल पड़ा हो, और शेर ने ज़बान-ए-हाल से कहा हो कि 'कल्ला सौफ़ त'लमून, सुम्मा कल्ला सौफ़ त'लमून' (नहीं, तुम जल्द ही जान जाओगे, फिर नहीं, तुम जल्द ही जान जाओगे)› शेर 3756
M5:3756 — الله الله این چه حالست ای عزیز / این چنین بیهوش گشتی از چه چیز
M5:3756
अर्थ · به زبانِ تو — आपकी भाषा · AI
Discussion — Ask about this beyt — answered from the Masnavi, every verse cited
Your conversation stays on this device unless you share it.
What readers asked0
No questions shared yet — yours could be the first.