पढ़िए दफ़्तर 5 अयाज़ी रहमतुल्लाह की कहानी, जिन्होंने सत्तर युद्ध लड़े थे, शहादत की उम्मीद में सीना खुला रखते थे। जब उन्हें उससे निराशा हुई, तो उन्होंने जिहाद-ए-असग़र से जिहाद-ए-अकबर की ओर रुख किया और एकांतवास किया। अचानक उन्होंने गाज़ियों के नगाड़े सुने, तो उनका नफ़्स अंदर से ज़ंजीरें तोड़ रहा था युद्ध की ओर जाने के लिए, और उन्होंने इस लालसा में अपने नफ़्स पर इल्ज़ाम लगाया। शेर 3788

M5:3788 — که مرا هر روز اینجا می‌کشی / جان من چون جان گبران می‌کشی

که مرا هر روز اینجا می‌کشیجان من چون جان گبران می‌کشی
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M5:3788

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अर्थ · به زبانِ تو — आपकी भाषा · AI

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