पढ़िए दफ़्तर 5 जौहर का हाथ से हाथ, आखिर में अयाज़ तक पहुँचना, और अयाज़ की समझदारी, और उसका उनकी नक़ल न करना, और बादशाह के गाल, माल, ख़िलअत और जागीर देने से गुमराह न होना, और धोखे और इम्तिहान के साथ ग़लत लोगों की अक़्ल की तारीफ़ करना कि 'नक़लची को मुसलमान मानना कब सही है? वह मुसलमान है, लेकिन कम ही होता है कि नक़लची इन इम्तिहानों से सलामती से निकले, क्योंकि उसमें देखने वालों जैसी स्थिरता नहीं होती, सिवाय उनके जिन पर अल्लाह की रहमत हो', क्योंकि हक़ एक है और उसके बहुत से दुश्मन हैं जो ग़लतफ़हमी पैदा करते हैं और हक़ से मिलते-जुलते हैं। नक़लची जब उस दुश्मन को नहीं पहचानता तो इस तरह वह हक़ को नहीं पहचानता, लेकिन हक़ उसके इस न पहचानने के बावजूद, अगर अल्लाह उसे हिदायत दे तो उसका यह न पहचानना उसे नुक़सान नहीं पहुँचाएगा। शेर 4068

M5:4068 — وآن جماعت جمله از جهل و عما / دَر شکسته دُرِّ امر شاه را

وآن جماعت جمله از جهل و عمادَر شکسته دُرِّ امر شاه را
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M5:4068

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अर्थ · به زبانِ تو — आपकी भाषा · AI

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