पढ़िए दफ़्तर 5 अयाज़ का इस शफ़ाअत में खुद को मुजरिम समझना और इस जुर्म की माफ़ी माँगना, और उस माफ़ी में भी खुद को मुजरिम समझना, और यह टूटन बादशाह की पहचान और अज़मत से पैदा होती है कि 'मैं तुम सब में से अल्लाह को सबसे ज़्यादा जानने वाला और अल्लाह से सबसे ज़्यादा डरने वाला हूँ' और अल्लाह तआला ने फ़रमाया कि 'निश्चय ही अल्लाह के बन्दों में से डरने वाले केवल आलिम लोग ही हैं' शेर 4159

M5:4159 — تا زنم من لاف کان شاه جهان / بهر بنده عفو کرد از مجرمان

تا زنم من لاف کان شاه جهانبهر بنده عفو کرد از مجرمان
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M5:4159

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अर्थ · به زبانِ تو — आपकी भाषा · AI

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