पढ़िए› दफ़्तर 5› उस हकीम की कहानी जिसने एक मोर को देखा कि वह अपनी सुंदर परों को चोंच से नोचकर फेंक रहा था और अपने शरीर को गंजा और बदसूरत बना रहा था, आश्चर्य से उसने पूछा कि 'क्या तुम्हें अफ़सोस नहीं होता?' उसने कहा 'होता है, लेकिन मेरे लिए जान परों से ज़्यादा प्यारी है और यह पर मेरी जान का दुश्मन है'› शेर 548
M5:548 — چون ز مرده زنده بیرون میکشد / هر که مرده گشت او دارد رشد
چون ز مرده زنده بیرون میکشدهر که مرده گشت او دارد رشد
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M5:548
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अर्थ · به زبانِ تو — आपकी भाषा · AI
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Discussion — Ask about this beyt — answered from the Masnavi, every verse cited
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