पढ़िए› दफ़्तर 5› उस हकीम की कहानी जिसने एक मोर को देखा कि वह अपनी सुंदर परों को चोंच से नोचकर फेंक रहा था और अपने शरीर को गंजा और बदसूरत बना रहा था, आश्चर्य से उसने पूछा कि 'क्या तुम्हें अफ़सोस नहीं होता?' उसने कहा 'होता है, लेकिन मेरे लिए जान परों से ज़्यादा प्यारी है और यह पर मेरी जान का दुश्मन है'› शेर 552
M5:552 — بر مکن آن پر که نپذیرد رفو / روی مخراش از عزا ای خوبرو
بر مکن آن پر که نپذیرد رفوروی مخراش از عزا ای خوبرو
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M5:552
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अर्थ · به زبانِ تو — आपकी भाषा · AI
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