مثنوی
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शेर के नीचे
अनुवाद
अर्थ
काँच
रीसेट
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दफ़्तर 5 ›
अनुभाग 161
بخش ۱۶۱ - نصیحت مبارزان او را کی با این دل و زهره کی تو داری کی از کلابیسه شدن چشم کافر اسیری دست بسته بیهوش شوی و دشنه از دست بیفتد زنهار زنهار ملازم مطبخ خانقاه باش و سوی پیکار مرو تا رسوا نشوی
योद्धाओं का उसे नसीहत करना कि 'इस दिल और हिम्मत के साथ जो तुम्हारे पास है, जब तुम काफ़िर की आँख में झाँकने से बेहोश हो जाओगे और हाथ से खंजर गिर जाएगा, ख़बरदार! ख़बरदार! ख़ानक़ाह के रसोई घर में ही रहो और जंग में मत जाओ, वरना रुसवा हो जाओगे'
मूल
हिन्दी
दोनों
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M5:3762
قوم گفتندش به پیکار و نبرد با چنین زهره که تو داری مگرد
M5:3763
چون ز چشم آن اسیر بستهدست غرقه گشتی کشتی تو در شکست
M5:3764
پس میان حملهٔ شیران نر که بود با تیغشان چون گوی سر
M5:3765
کی توانی کرد در خون آشنا چون نهای با جنگ مردان آشنا
M5:3766
که ز طاقاطاق گردنها زدن طاقطاق جامه کوبان ممتهن
M5:3767
بس تن بیسر که دارد اضطراب بس سر بیتن به خون بر چون حباب
M5:3768
زیر دست و پای اسپان در غزا صد فنا کن غرقه گشته در فنا
M5:3769
این چنین هوشی که از موشی پرید اندر آن صف تیغ چون خواهد کشید
M5:3770
چالش است آن حمزه خوردن نیست این تا تو برمالی بخوردن آستین
M5:3771
نیست حمزه خوردن اینجا تیغ بین حمزهای باید درین صف آهنین
M5:3772
کار هر نازکدلی نبود قتال که گریزد از خیالی چون خیال
M5:3773
کار ترکانست نه ترکان برو جای ترکان هست خانه خانه شو
पिछला بخش ۱۶۰ - وصف ضعیف دلی و سستی صوفی سایه پرورد مجاهده ناکرده درد و داغ عشق ناچشیده به سجده و دستبوس عام و به حرمت نظر کردن و بانگشت نمودن ایشان کی امروز در زمانه صوفی اوست غره شده و بوهم بیمار شده همچون آن معلم کی کودکان گفتند کی رنجوری و با این وهم کی من مجاهدم مرا درین ره پهلوان میدانند با غازیان به غزا رفته کی به ظاهر نیز هنر بنمایم در جهاد اکبر مستثناام جهاد اصغر خود پیش من چه محل دارد خیال شیر دیده و دلیریها کرده و مست این دلیری شده و روی به بیشه نهاده به قصد شیر و شیر به زبان حال گفته کی کلا سوف تعلمون ثم کلا سوف تعلمون कमज़ोर दिल और सुस्ती का वर्णन, ऐसे सूफी का जो छाया में पला-बढ़ा हो, जिसने मुजाहदा न किया हो, जिसने इश्क़ का दर्द और दाग़ न चखा हो, जो आम लोगों के सजदे और हाथ चूमने से, और उनके इज्ज़त से देखने और उंगली से इशारा करने से कि 'आज ज़माने में यही सूफी है' – इससे गुमराह हो गया हो और वहम से बीमार हो गया हो, जैसे वह शिक्षक जिससे बच्चों ने कहा कि 'आप बीमार हैं', और इस वहम के साथ कि 'मैं मुजाहिद हूँ, मुझे इस राह में पहलवान समझते हैं', गाज़ियों के साथ जंग में गया हो कि 'ज़ाहिर में भी मैं अपनी हुनर दिखाऊँ, जिहाद-ए-अकबर में तो मैं मुस्तसना हूँ, जिहाद-ए-असग़र मेरे लिए क्या मायने रखता है', शेर का ख़्याल देखकर और बहादुरी के कारनामे करके और इस बहादुरी में मस्त होकर, जंगल की ओर शेर की तलाश में निकल पड़ा हो, और शेर ने ज़बान-ए-हाल से कहा हो कि 'कल्ला सौफ़ त'लमून, सुम्मा कल्ला सौफ़ त'लमून' (नहीं, तुम जल्द ही जान जाओगे, फिर नहीं, तुम जल्द ही जान जाओगे)
अगला بخش ۱۶۲ - حکایت عیاضی رحمهالله کی هفتاد غزو کرده بود سینه برهنه بر امید شهید شدن چون از آن نومید شد از جهاد اصغر رو به جهاد اکبر آورد و خلوت گزید ناگهان طبل غازیان شنید نفس از اندرون زنجیر میدرانید سوی غزا و متهم داشتن او نفس خود را درین رغبت अयाज़ी रहमतुल्लाह की कहानी, जिन्होंने सत्तर युद्ध लड़े थे, शहादत की उम्मीद में सीना खुला रखते थे। जब उन्हें उससे निराशा हुई, तो उन्होंने जिहाद-ए-असग़र से जिहाद-ए-अकबर की ओर रुख किया और एकांतवास किया। अचानक उन्होंने गाज़ियों के नगाड़े सुने, तो उनका नफ़्स अंदर से ज़ंजीरें तोड़ रहा था युद्ध की ओर जाने के लिए, और उन्होंने इस लालसा में अपने नफ़्स पर इल्ज़ाम लगाया।