দিওয়ান-এ শামস› গজল ১৮৯৯› শের ৪ ← পূর্ববর্তী · পরবর্তী →
দিওয়ান-এ শামস · غزل شمارهٔ ۱۸۹۹
- دل سنگین او چون ریخت خونم تو خون من ز سنگ خاره بستان
G1899:4
আপনার ভাষা
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এই শের-এর ব্যাখ্যা
এখনো লেখা হয়নি — এই গজলের পরিপ্রেক্ষিতে শেরটির একটি নিবিড় পাঠ:
সম্পূর্ণ গজল ↗
- 1 دل خون خواره را یک باره بستان·ز غم صدپاره شد یک پاره بستان
- 2 بکن جان مرا امروز چاره·وگر نی جان از این بیچاره بستان
- 3 همه شب دوش می گفتم خدایا·که داد من از آن خون خواره بستان
- 4 دل سنگین او چون ریخت خونم·تو خون من ز سنگ خاره بستان
- 5 به دست دل فرستادم دو سه خط·یکی خط را از آن آواره بستان
- 6 در آن خط صورت و اشکال عشق است·برای عبرت و نظاره بستان
- 7 دلم با عشق هم استاره افتاد·نخواهی جرم از استاره بستان
ganjoor: sh1899 · public domain