مثنوی
পড়ুন
প্রশ্ন
English فارسی Español Français Deutsch Nederlands Türkçe العربية اردو हिन्दी Русский Bahasa Indonesia 中文 日本語 Italiano Português 한국어 Bosanski Azərbaycanca Oʻzbekcha Тоҷикӣ دری বাংলা پښتو 繁體中文 Svenska Română Suomi Українська ไทย Filipino
▾
Aa
লেখার আকার
A −
A +
অনুবাদ ফন্ট
Aa
Aa
বয়েতের নিচে
অনুবাদ
অর্থ
কাচ
রিসেট
☀ ☾
পড়ুন ›
দফতর ৫ ›
বিভাগ ৫৫
بخش ۵۵ - پرسیدن آن پادشاه از آن مدعی نبوت کی آنک رسول راستین باشد و ثابت شود با او چه باشد کی کسی را بخشد یا به صحبت و خدمت او چه بخشش یابند غیر نصیحت به زبان کی میگوید
সেই রাজার প্রশ্ন নবীর দাবিদারকে, 'যে সত্যিকারের রাসূল এবং যার সত্যতা প্রতিষ্ঠিত, সে কী দান করে বা তার সঙ্গ ও সেবার মাধ্যমে মানুষ কী পায়, মৌখিক উপদেশ ছাড়া যা সে বলে?'
মূল
বাংলা
উভয়
✦
এই পুরো অংশটি আপনার ভাষায় পড়ুন
0 /16
M5:1225
شاه پرسیدش که باری وحی چیست یا چه حاصل دارد آن کس کو نبیست
M5:1226
گفت خود آن چیست کش حاصل نشد یا چه دولت ماند کو واصل نشد
M5:1227
گیرم این وحی نبی گنجور نیست هم کم از وحی دل زنبور نیست
M5:1228
چونک او حی الرب الی النحل آمدست خانهٔ وحیش پر از حلوا شدست
M5:1229
او به نور وحی حق عزوجل کرد عالم را پر از شمع و عسل
M5:1230
این که کرمناست و بالا میرود وحیش از زنبور کمتر کی بود
M5:1231
نه تو اعطیناک کوثر خواندهای پس چرا خشکی و تشنه ماندهای
M5:1232
یا مگر فرعونی و کوثر چو نیل بر تو خون گشتست و ناخوش ای علیل
M5:1233
توبه کن بیزار شو از هر عدو کو ندارد آب کوثر در کدو
M5:1234
هر کرا دیدی ز کوثر سرخرو او محمدخوست با او گیر خو
M5:1235
تا احب لله آیی در حسیب کز درخت احمدی با اوست سیب
M5:1236
هر کرا دیدی ز کوثر خشک لب دشمنش میدار همچون مرگ و تب
M5:1237
گرچه بابای توست و مام تو کو حقیقت هست خونآشام تو
M5:1238
از خلیل حق بیاموز این سیر که شد او بیزار اول از پدر
M5:1239
تا که ابغض لله آیی پیش حق تا نگیرد بر تو رشک عشق دق
M5:1240
تا نخوانی لا و الا الله را در نیابی منهج این راه را
পূর্ববর্তী بخش ۵۴ - مناجات মুনাজাত
পরবর্তী بخش ۵۶ - داستان آن عاشق کی با معشوق خود برمیشمرد خدمتها و وفاهای خود را و شبهای دراز تتجافی جنوبهم عن المضاجع را و بینوایی و جگر تشنگی روزهای دراز را و میگفت کی من جزین خدمت نمیدانم اگر خدمت دیگر هست مرا ارشاد کن کی هر چه فرمایی منقادم اگر در آتش رفتن است چون خلیل علیهالسلام و اگر در دهان نهنگ دریا فتادنست چون یونس علیهالسلام و اگر هفتاد بار کشته شدن است چون جرجیس علیهالسلام و اگر از گریه نابینا شدن است چون شعیب علیهالسلام و وفا و جانبازی انبیا را علیهمالسلام شمار نیست و جواب گفتن معشوق او را সেই প্রেমিকের কাহিনী যে তার প্রেমিকার কাছে তার সেবা ও বিশ্বস্ততা বর্ণনা করছিল, দীর্ঘ রজনী যখন তাদের পার্শ্বদেশ বিছানা ত্যাগ করত (তত্তাজাফা জুনুবুহুম আনিল মাদাজিয়ি), দীর্ঘ দিবসের নিঃস্বতা ও তৃষ্ণা, এবং সে বলছিল, 'আমি এই সেবা ছাড়া আর কোনো সেবা জানি না। যদি অন্য কোনো সেবা থাকে, তবে আমাকে পথ দেখাও, কারণ তুমি যা আদেশ করবে, আমি তা পালন করব, তা আগুনে প্রবেশ করাই হোক যেমন খলিল (আ.) করেছিলেন, বা সাগরের তিমি মাছের মুখে পতিত হওয়াই হোক যেমন ইউনুস (আ.) করেছিলেন, বা সত্তর বার নিহত হওয়াই হোক যেমন জুরজিস (আ.) করেছিলেন, বা কান্নার কারণে অন্ধ হওয়াই হোক যেমন শুয়াইব (আ.) করেছিলেন।' নবীদের বিশ্বস্ততা ও আত্মোৎসর্গের কোনো সংখ্যা নেই। এবং তার প্রেমিকার জবাব।