पढ़िए दफ़्तर 1 उसकी कहानी जिसने एक मित्र के दरवाज़े पर दस्तक दी, अंदर से कहा गया, कौन है, उसने कहा, मैं हूँ, उसने कहा, जब तुम मैं हो, तो मैं किसी को दरवाज़ा नहीं खोलता, मैं किसी मित्र को नहीं जानता जो मैं हो, जाओ शेर 3077

M1:3077 — اکمه و ابرص چه باشد مرده نیز / زنده گردد از فسون آن عزیز

اکمه و ابرص چه باشد مرده نیززنده گردد از فسون آن عزیز
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M1:3077

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अर्थ · به زبانِ تو — आपकी भाषा · AI

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