पढ़िए› दफ़्तर 3› उस पहाड़ी तपस्वी की कहानी का शेष भाग जिसने यह मन्नत मानी थी कि मैं पेड़ से जंगली फल नहीं तोड़ूँगा और पेड़ को नहीं झाड़ूँगा और किसी को सीधे या इशारे से नहीं कहूँगा कि उसे झाड़ो, मैं वही खाऊँगा जो हवा ने पेड़ से गिराया होगा› शेर 1644
M3:1644 — هر زمان دل را دگر رایی بود / آن نه از وی لیک از جایی بود
هر زمان دل را دگر رایی بودآن نه از وی لیک از جایی بود
✦ इस बैत को हिन्दी में प्रस्तुत करें
M3:1644
❋ ❋ ❋
अर्थ · به زبانِ تو — आपकी भाषा · AI
❋
Discussion — Ask about this beyt — answered from the Masnavi, every verse cited
Your conversation stays on this device unless you share it.
What readers asked0
No questions shared yet — yours could be the first.