पढ़िए दफ़्तर 4 उस साधु की कहानी जो अकाल के साल में भी अपनी ग़रीबी और अनेक आश्रितों के बावजूद खुश और हँसमुख था, और लोग भूख से मर रहे थे। लोगों ने उससे कहा कि यह खुशी का समय नहीं, बल्कि सौ मातम का समय है। उसने कहा कि 'मुझ पर तो कोई बोझ नहीं' शेर 3246

M4:3246 — من همی‌بینم بهر دشت و مکان / خوشه‌ها انبه رسیده تا میان

من همی‌بینم بهر دشت و مکانخوشه‌ها انبه رسیده تا میان
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M4:3246

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अर्थ · به زبانِ تو — आपकी भाषा · AI

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