पढ़िए दफ़्तर 5 उस व्यक्ति की कहानी जो डर के मारे अपने आप को एक घर में फेंक दिया, उसका चेहरा केसर की तरह पीला, होंठ नीले रंग के, हाथ पेड़ के पत्तों की तरह काँप रहे थे। घर के मालिक ने पूछा, 'सब खैरियत तो है? क्या हुआ?' उसने कहा, 'बाहर गधे पकड़े जा रहे हैं मज़दूरी के लिए।' मालिक ने कहा, 'मुबारक हो, गधे पकड़े जा रहे हैं, तुम गधे नहीं हो, तो तुम क्यों डर रहे हो?' उसने कहा, 'गधे को गंभीरता से पकड़ा जा रहा है, आज इम्तियाज़ खत्म हो गया है। मुझे डर है कि मुझे गधा समझ लिया जाएगा।' शेर 2543

M5:2543 — نیست شاه شهر ما بیهوده گیر / هست تمییزش سمیعست و بصیر

نیست شاه شهر ما بیهوده گیرهست تمییزش سمیعست و بصیر
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M5:2543

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अर्थ · به زبانِ تو — आपकी भाषा · AI

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