पढ़िए› दफ़्तर 5› उस मुजाहिद की कहानी जो हर रोज़ अपनी चाँदी की पोटली से एक दिरहम खाई में फेंकता था, धीरे-धीरे, अपनी लालच और नफ़्स की इच्छा और नफ़्स के वसवसे के खिलाफ़, जो कहता था कि 'जब तुम फेंक रहे हो, तो एक बार में ही फेंक दो ताकि मैं छुटकारा पाऊँ' क्योंकि उसने कहा था कि 'मैं यह आराम भी नहीं दूँगा' (अल-इलियास अहदी अल-राहतिन).› शेर 3809
M5:3809 — آن یکی بودش به کف در چل درم / هر شب افکندی یکی در آب یم
آن یکی بودش به کف در چل درمهر شب افکندی یکی در آب یم
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M5:3809
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अर्थ · به زبانِ تو — आपकी भाषा · AI
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