पढ़िए दफ़्तर 5 उस हकीम की कहानी जिसने एक मोर को देखा कि वह अपनी सुंदर परों को चोंच से नोचकर फेंक रहा था और अपने शरीर को गंजा और बदसूरत बना रहा था, आश्चर्य से उसने पूछा कि 'क्या तुम्हें अफ़सोस नहीं होता?' उसने कहा 'होता है, लेकिन मेरे लिए जान परों से ज़्यादा प्यारी है और यह पर मेरी जान का दुश्मन है' शेर 545

M5:545 — ای بسا نازآوری زد پر و بال / آخر الامر آن بر آن کس شد وبال

ای بسا نازآوری زد پر و بالآخر الامر آن بر آن کس شد وبال
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M5:545

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अर्थ · به زبانِ تو — आपकी भाषा · AI

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