पढ़िए› दफ़्तर 5› उस हकीम की कहानी जिसने एक मोर को देखा कि वह अपनी सुंदर परों को चोंच से नोचकर फेंक रहा था और अपने शरीर को गंजा और बदसूरत बना रहा था, आश्चर्य से उसने पूछा कि 'क्या तुम्हें अफ़सोस नहीं होता?' उसने कहा 'होता है, लेकिन मेरे लिए जान परों से ज़्यादा प्यारी है और यह पर मेरी जान का दुश्मन है'› शेर 546
M5:546 — خوشی ناز ار دمی بفرازدت / بیم و ترس مضمرش بگدازدت
خوشی ناز ار دمی بفرازدتبیم و ترس مضمرش بگدازدت
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M5:546
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अर्थ · به زبانِ تو — आपकी भाषा · AI
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