पढ़िए दफ़्तर 6 चूहे का कछुए से गिड़गिड़ाकर कहना कि बहाने मत सोचो और इस ज़रूरत को टालो मत, क्योंकि देरी में आफ़तें हैं, और सूफी 'इब्नुल वक्त' (समय का बेटा) है, और बेटा पिता का दामन नहीं छोड़ता, और दयालु पिता सूफी है जो उसे वक्त से बांधे रखता है, उसे कल का मोहताज नहीं करता, उसे अपनी शीघ्र गणना के गुलिस्तां में इतना डुबो देता है कि वह आम लोगों की तरह भविष्य की प्रतीक्षा नहीं करता, वह एक नदी है न कि युग, क्योंकि अल्लाह के पास न सुबह है न शाम, अतीत और भविष्य, अज़ल और अबद वहाँ नहीं होते, आदम पहले और दज्जाल बाद में नहीं होता, क्योंकि ये सब 'अक्ल-ए-जुज़वी' (आंशिक बुद्धि) के दायरे में हैं, और 'आलम-ए-ला-मकान व ला-ज़मान' (बिना स्थान और बिना समय का संसार) में ये रस्में नहीं होतीं, तो वह 'इब्नुल वक्त' है जिससे केवल समयों के भेद का इन्कार समझा जाता है, जैसे 'अल्लाह वाहिद' से दो का इन्कार समझा जाता है, न कि एक की हक़ीक़त शेर 2743

M6:2743 — هر کراهت در دل مرد بهی / چون در آید از فنی نبود تهی

هر کراهت در دل مرد بهیچون در آید از فنی نبود تهی
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M6:2743

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अर्थ · به زبانِ تو — आपकी भाषा · AI

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