पढ़िए दफ़्तर 6 ख़्वारज़्मशाह रहमतुल्लाह अलैह का अपने जुलूस में एक बहुत ही दुर्लभ घोड़ा देखना और शाह के दिल का उस घोड़े की सुंदरता और फुर्ती से लगाव होना, और इमादुलमुल्क का उस घोड़े को शाह के दिल में ठंडा कर देना, और शाह का उसे अपने देखने पर वरीयता देना, जैसा कि हकीम रहमतुल्लाह अलैह ने अपनी इलाहीनामा में फ़रमाया है: “जब ज़बान हसद हो जाए, तो यूसुफ़ को खस की तरह गज़ से खरीदोगे,” भाइयों की दलाली से हसद की वजह से ग्राहक के दिल में इतनी खूबसूरती छिप गई और बदसूरत दिखने लगी कि “और वे उसमें से ज़ाहिद थे” शेर 3389

M6:3389 — بی‌گمان ترک ادب باشد ز ما / کفر نعمت باشد و فعل هوا

بی‌گمان ترک ادب باشد ز ماکفر نعمت باشد و فعل هوا
✦ इस बैत को हिन्दी में प्रस्तुत करें

M6:3389

❋ ❋ ❋

अर्थ · به زبانِ تو — आपकी भाषा · AI

Discussion — Ask about this beyt — answered from the Masnavi, every verse cited

Your conversation stays on this device unless you share it.

What readers asked

No questions shared yet — yours could be the first.