पढ़िए› दफ़्तर 6› बुखारा के सदर-ए-जहाँ की कहानी कि जो भी मांगने वाला ज़ुबान से आम सदक़ा मांगता, वह उसकी बेशुमार अता से महरूम रहता, और एक विद्वान दरवेश ने भूलवश और अत्यधिक लालच और जल्दबाजी में सदर-ए-जहाँ के जुलूस में ज़ुबान से मांगा, तो उसने उससे मुँह मोड़ लिया, और वह हर दिन एक नई तरकीब बनाता और कभी खुद को चादर के नीचे औरत बना लेता और कभी अंधा बना लेता और अपनी आँखों और चेहरे को ढँक लेता, फिर भी वह उसे अपनी फ़रासत से पहचान लेता, आदि› शेर 3817
M6:3817 — کرد زاریها بسی چاره نبود / گفت هر نوعی نبودش هیچ سود
کرد زاریها بسی چاره نبودگفت هر نوعی نبودش هیچ سود
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M6:3817
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अर्थ · به زبانِ تو — आपकी भाषा · AI
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