पढ़िए दफ़्तर 6 बुखारा के सदर-ए-जहाँ की कहानी कि जो भी मांगने वाला ज़ुबान से आम सदक़ा मांगता, वह उसकी बेशुमार अता से महरूम रहता, और एक विद्वान दरवेश ने भूलवश और अत्यधिक लालच और जल्दबाजी में सदर-ए-जहाँ के जुलूस में ज़ुबान से मांगा, तो उसने उससे मुँह मोड़ लिया, और वह हर दिन एक नई तरकीब बनाता और कभी खुद को चादर के नीचे औरत बना लेता और कभी अंधा बना लेता और अपनी आँखों और चेहरे को ढँक लेता, फिर भी वह उसे अपनी फ़रासत से पहचान लेता, आदि शेर 3826

M6:3826 — هیچ مگشا لب نشین و می‌نگر / تا کند صدر جهان اینجا گذر

هیچ مگشا لب نشین و می‌نگرتا کند صدر جهان اینجا گذر
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M6:3826

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अर्थ · به زبانِ تو — आपकी भाषा · AI

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