पढ़िए दफ़्तर 6 इस खबर की तफ़सीर में कि पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया: “दो लालची कभी سیر نہیں ہوتے، दुनिया का तलबगार और इल्म का तलबगार,” कि यह इल्म दुनिया के इल्म से अलग होना चाहिए ताकि दो क़िस्म हो, लेकिन दुनिया का इल्म भी दुनिया ही होगा, आदि। और अगर ऐसा ही हो कि “तालिब-ए-दुनिया व तालिब-ए-दुनिया” तकरार होगी न कि तकसीम, उसके बयान के साथ शेर 3884

M6:3884 — غیر دنیا پس چه باشد آخرت / کت کند زینجا و باشد رهبرت

غیر دنیا پس چه باشد آخرتکت کند زینجا و باشد رهبرت
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M6:3884

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अर्थ · به زبانِ تو — आपकी भाषा · AI

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