पढ़िए› दफ़्तर 6› चीन के शहरों में छिपकर रहने के बाद और धीरज के बाद, बड़े भाई का बेताब हो जाना कि “मैं चला, अलविदा! मैं खुद को राजा के सामने पेश करता हूँ, चाहे मेरा कदम मुझे मेरे मक़सद तक पहुँचाए या मैं अपना सर रख दूँ जैसे दिल उसके हाथों से,” और उसके भाइयों की नसीहत का उसे कोई फायदा न होना: “ऐ आशिकों को नसीहत करने वाले, उस फ़ितने को छोड़ दे जिसे अल्लाह ने गुमराह कर दिया, तू उसे कैसे हिदायत देगा,” आदि› शेर 4088
M6:4088 — صدهزاران مکر در حیوان چو هست / چون بود مکر بشر کو مهترست
صدهزاران مکر در حیوان چو هستچون بود مکر بشر کو مهترست
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M6:4088
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अर्थ · به زبانِ تو — आपकी भाषा · AI
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