पढ़िए दफ़्तर 6 उस गायक की कहानी जिसने तुर्क अमीर की महफ़िल में यह ग़ज़ल शुरू की कि 'तुम फूल हो या नरगिस हो या सरू हो या चाँद हो, मैं नहीं जानता। इस बेदिल आशिक़ से तुम क्या चाहते हो, मैं नहीं जानता।' और तुर्क का चिल्लाकर कहना कि 'वह बताओ जो तुम जानते हो' और गायक का अमीर को जवाब देना। शेर 705

M6:705 — می‌ندانم که چه خدمت آرمت / تن زنم یا در عبارت آرمت

می‌ندانم که چه خدمت آرمتتن زنم یا در عبارت آرمت
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M6:705

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अर्थ · به زبانِ تو — आपकी भाषा · AI

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