पढ़िए दफ़्तर 6 उस गायक की कहानी जिसने तुर्क अमीर की महफ़िल में यह ग़ज़ल शुरू की कि 'तुम फूल हो या नरगिस हो या सरू हो या चाँद हो, मैं नहीं जानता। इस बेदिल आशिक़ से तुम क्या चाहते हो, मैं नहीं जानता।' और तुर्क का चिल्लाकर कहना कि 'वह बताओ जो तुम जानते हो' और गायक का अमीर को जवाब देना। शेर 711

M6:711 — گرز را بگرفت سرهنگی بدست / گفت نه مطرب کشی این دم بدست

گرز را بگرفت سرهنگی بدستگفت نه مطرب کشی این دم بدست
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M6:711

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अर्थ · به زبانِ تو — आपकी भाषा · AI

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