पढ़िए दफ़्तर 6 एक लापरवाह आदमी की उपमा जो अपनी उम्र बर्बाद करता है और मरने के समय उस तंग हालात में तौबा और इस्तग़फ़ार करने लगता है, जैसे हलबी शिया हर साल आशूरा के दिनों में अंताकिया के दरवाज़े पर मातम करते हैं और एक अजनबी कवि सफ़र से आकर पूछता है कि 'यह चीख-पुकार किस मातम की है' शेर 777

M6:777 — روز عاشورا همه اهل حلب / باب انطاکیه اندر تا به شب

روز عاشورا همه اهل حلبباب انطاکیه اندر تا به شب
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M6:777

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अर्थ · به زبانِ تو — आपकी भाषा · AI

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