पढ़िए दफ़्तर 6 एक लापरवाह आदमी की उपमा जो अपनी उम्र बर्बाद करता है और मरने के समय उस तंग हालात में तौबा और इस्तग़फ़ार करने लगता है, जैसे हलबी शिया हर साल आशूरा के दिनों में अंताकिया के दरवाज़े पर मातम करते हैं और एक अजनबी कवि सफ़र से आकर पूछता है कि 'यह चीख-पुकार किस मातम की है' शेर 785

M6:785 — این رئیس زفت باشد که بمرد / این چنین مجمع نباشد کار خرد

این رئیس زفت باشد که بمرداین چنین مجمع نباشد کار خرد
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M6:785

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अर्थ · به زبانِ تو — आपकी भाषा · AI

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