दीवान-ए-शम्स›
ग़ज़ल 1571›
शेर 4
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ما را تو به زرد و سرخ مفریب
کز خنجر عشق روی زردیم
G1571:4
आपकी भाषा
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इस शेर की व्याख्या
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