दीवान-ए-शम्स›
ग़ज़ल 168›
शेर 3
-
برو ای غصه دمی زحمت خود کوته کن
باده عشق بیا زود که جانت بزیا
G168:3
आपकी भाषा
आपकी भाषा में अभी तक कोई अर्थ नहीं — यह पूरी ग़ज़ल के लिए एक साथ बनता है:
ai-draft · gemini-2.5-pro
इस शेर की व्याख्या
अभी तक नहीं लिखी गई — इस ग़ज़ल के भीतर इस शेर का गहरा पाठ:
ganjoor: sh168 · public domain