दीवान-ए-शम्स›
ग़ज़ल 174›
शेर 3
-
با منی وز من نمیدانی خبر
چشم بستم جادوی کردم تو را
G174:3
आपकी भाषा
आपकी भाषा में अभी तक कोई अर्थ नहीं — यह पूरी ग़ज़ल के लिए एक साथ बनता है:
ai-draft · gemini-2.5-pro
इस शेर की व्याख्या
अभी तक नहीं लिखी गई — इस ग़ज़ल के भीतर इस शेर का गहरा पाठ:
ganjoor: sh174 · public domain