दीवान-ए-शम्स›
ग़ज़ल 2013›
शेर 2
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نام رندی را بکن بر خود درست
خویشتن را لاابالی نام کن
G2013:2
आपकी भाषा
आपकी भाषा में अभी तक कोई अर्थ नहीं — यह पूरी ग़ज़ल के लिए एक साथ बनता है:
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इस शेर की व्याख्या
अभी तक नहीं लिखी गई — इस ग़ज़ल के भीतर इस शेर का गहरा पाठ:
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